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तीहार जेल में पांच साल: उमर खालिद का न्यायहीन संघर्ष और लोकतंत्र की चुनौती

दिल्ली की तिहाड़ जेल में पांच वर्ष पूर्ण कर चुके हैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, समाजसेवी और शोधकर्ता उमर खालिद। CAA और NRC विरोधी आंदोलन में नेतृत्व देने के आरोप में गिरफ्तार किए गए, लेकिन आज तक उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हो पाया।

स्वतंत्र विचार व्यक्त करने और अल्पसंख्यक समुदाय का नेतृत्व करने के कारण न्याय के अभाव में लंबे समय तक बंदी बनाए रखना लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

शांतिपूर्ण विरोध के लिए राजद्रोह और साजिश के मामले में बंद उमर खालिद समेत कई अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की जमानत अर्जी बार-बार खारिज होने से उनका कीमती वक्त जेल में कट रहा है।

देश-विदेश के मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह भेदभाव केवल अल्पसंख्यक मुस्लिम होने के कारण हो रहा है, जो भारत के संविधान के मूल अधिकारों और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

यह स्थिति केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक गंभीर संकट है।

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