पाँच साल से बिना मुकदमे के तिहाड़ में: उमर खालिद का संघर्ष जारी
पूर्व छात्र नेता और एनआरसी-सीएए विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरे उमर खालिद ने अब पाँच साल तिहाड़ जेल में बिना मुकदमे के पूरे कर लिए हैं। सितंबर 2020 में दिल्ली दंगा साजिश मामले में यूएपीए कानून के तहत उनकी गिरफ्तारी हुई थी और तब से वे लगातार न्यायिक हिरासत में हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ता, छात्र संगठन और कई राजनीतिक दलों ने इस लंबी कैद पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किसी भी नागरिक का तेज़ और निष्पक्ष मुकदमा एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन खालिद के मामले में बार-बार सुनवाई टलने से न्याय में देरी हो रही है।
समर्थक याद दिलाते हैं कि खालिद नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ सबसे मुखर आवाज़ों में से एक थे। उनका मानना है कि यह लंबी कैद विरोध की आवाज़ दबाने का प्रयास है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इसी मामले में कई सह-आरोपी जमानत पा चुके हैं, लेकिन खालिद की जमानत याचिकाएँ लगातार खारिज की जा रही हैं। पाँच साल से मुकदमे की कार्यवाही शुरू न होना केवल खालिद के लिए अन्याय नहीं, बल्कि भारत की न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल उठाता है।