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बाबरी मस्जिद से राम मंदिर तक: नरसिंह राव से नरेंद्र मोदी तक का ऐतिहासिक सफर

यह मुद्रा देखते ही, इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना याद आने लगती है। 1991 में, कांग्रेस ने 244 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की और केंद्र में सरकार बनाई। नरसिंह राव को प्रधानमंत्री बनाया गया। उस समय 19 नवंबर 1992 को राष्ट्रीय एकता दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया था।

1992 के दिसंबर में, जब हिंदू बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए एकजुट हो रहे थे, कुछ राजनेता और सुरक्षा एजेंसियां नरसिंह राव से संपर्क करने की कोशिश कर रही थीं। वे उन्हें तुरंत सेना भेजने और बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए कह रहे थे, ताकि देश को दंगों से बचाया जा सके। लेकिन उस समय प्रधानमंत्री कार्यालय से जवाब आया कि वह सो रहे हैं या पूजा में व्यस्त हैं। और फिर, 6 दिसंबर 1992 को हिंदू समुदाय ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया।

बाबरी मस्जिद गिराने के बाद, जमियत/जमात के लोग नरसिंह राव से मिले और कहा जाता है कि नरसिंह राव ने मुसलमानों से मस्जिद निर्माण का वादा किया था। 9 नवंबर 2019 को, भारतीय संविधानिक सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि बाबरी मस्जिद के स्थल सहित 2.77 एकड़ "विवादित भूमि" राम मंदिर के निर्माण के लिए हस्तांतरित की जाएगी।

5 अगस्त 2020 को, नरेंद्र मोदी ने बाबरी मस्जिद की जगह पर राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। फिर, 22 जनवरी 2024 को, नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का उद्घाटन किया। अंत में, 9 फरवरी 2024 को मोदी सरकार ने नरसिंह राव को भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया।

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