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आई लव मुहम्मद —

आई लव मुहम्मद —
फज़लुल अहमद।
इस लोकतांत्रिक देश में मैं क्या कहूँ, भाई,
शर्म, शर्म, शर्म — यहाँ लोकतंत्र नहीं है!
"जै श्रीराम" नहीं बोलोगे तो कोई तुम्हें मार देता है;
"आई लव मुहम्मद" कहो तो कोई जेल भेज देता है!
छाती में पैगंबर बसते हैं — मेरे हृदय में पैगंबर का घर,
दमघोंटू छाती में आग लगा दो, फिर सब जाग उठेगा।
जिसने दुनियाँ में शांति फैलाई — क्या तुम उसके नाम पर साजिश करोगे?
सैकड़ों-हज़ारों बार उस नाम का जिक्र कर मैं क़ैद होना चाहूँगा।
जितना मारो, जितना जेल में बंद करो, जितनी बेइज़्ज़ती करो,
इस दिल में पैगंबर का महान नाम उच्चरित होगा।
नरक के कीड़े जलकर खाक हो जाएँ — स्वर्ग का स्वाद मिटे,
सारी ज़िंदगी मेरे दिल से निकलेगा: "आई लव मुहम्मद"।

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