কবিতা
✍️ डॉ. ए. कलाम
05/09/2025
5 सितम्बर, सुबह 11 बजे।
स्कूल गेट के पास खड़े—
एक वृद्ध शिक्षक।
धोती–पंजाबी पहने,
हाथ में पुराना बैग,
आँखों में थकान।
अंदर चल रहा है
फूल, माला...
फोटो सेशन।
माइक पर घोषणा—
“जिन्होंने स्कूल की नींव रखी,
उनके प्रति कृतज्ञता!”
वृद्ध शिक्षक देखते हैं,
छात्र अब बड़े नेता, नीति-निर्धारक।
उन्हें पहचानने का
जरा भी समय नहीं।
दोपहर में, छात्र के फेसबुक पर तस्वीर—
सिर झुका, हाथ में माला,
‘प्रणाम’।
कैप्शन:
“My guru, my guide, my god 🙏
Without him, I am nothing.”