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बिहार विधानसभा चुनावों की समीक्षा

बिहार की 243 सीटों पर विधानसभा चुनाव अक्टूबर–नवंबर 2025 में होने की संभावना है। 2020 के चुनाव के बाद से जेडीयू–भाजपा गठबंधन सरकार में कई रणनीतिक फेरबदल हुए हैं, जिससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR)

भारत निर्वाचन आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस और आपत्तियाँ उठी हैं। कई क्षेत्रीय दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया एनडीए को लाभ पहुँचाने के लिए की जा रही है।

65 लाख नाम काटे जाने का आरोप
सबसे बड़ी विवादास्पद बात यह है कि करीब 65 लाख नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से हटा दिए गए हैं। विपक्षी दलों, खासकर सीपीआई(एमएल), ने आयोग पर जवाबदेही की कमी का आरोप लगाया। साथ ही, लगभग 5,000 उत्तर प्रदेश के लोगों को अलग-अलग नामों से सूची में शामिल किए जाने की भी शिकायतें मिली हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का दखल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएँ हो रही हैं और मताधिकार जैसे मौलिक संवैधानिक अधिकार पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

राजनीतिक अभियान और मतदाता अधिकार आंदोलन

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस–इंडिया गठबंधन ने हाल ही में 16-दिवसीय “वोटर अधिकार यात्रा” पूरी की, जिसका उद्देश्य था—मतदाता अधिकारों, चुनावी पारदर्शिता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जागरूकता फैलाना। खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एसआईआर प्रक्रिया के जरिए “वोट चोरी” की योजना बना रही है और बिहारवासियों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने सीएम नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा कि वे “समाजवादी” से भाजपा–आरएसएस के मोहरे बन चुके हैं।

विपक्षी राज्यों का समर्थन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने निर्वाचन आयोग को “कठपुतली” कहा और मतदाता सूची से नाम काटने को “मताधिकार की हत्या” करार दिया।


चुनावी मुकाबला: करीबी दांव-पेंच और छोटे अंतर

  • पिछले चुनाव में करीबी हार-जीत: 2020 के चुनाव में 30 से अधिक सीटों पर जीत-हार का अंतर 3,000 वोटों से भी कम रहा। 2025 में यही सीटें असली रणक्षेत्र होंगी।

  • नया खिलाड़ी: प्रशांत किशोर के नेतृत्व में जन सुराज एक नई राजनीतिक ताकत के रूप में उभर रहा है। उनका दावा है कि नीतीश कुमार की कमजोर स्थिति और उनके जनाधारित ढाँचे से उन्हें बढ़त मिल सकती है।


मुख्य प्रवृत्तियाँ

  • गठबंधन: बिहार की राजनीति में बार-बार NDA और महागठबंधन के बीच फेरबदल होता रहा है।

  • मतदाता सूची: SIR के जरिए लाखों नाम हटाए जाने से चुनावी निष्पक्षता पर गहरे सवाल उठे हैं।

  • चुनावी मुकाबला: कई सीटों पर बेहद कम अंतर से जीत-हार तय हो सकती है।

  • नया प्रतिद्वंद्वी: जन सुराज मौजूदा समीकरणों को अप्रत्याशित रूप से बदल सकता है।

  • अभियान: वोटर अधिकार यात्रा ने विपक्षी दलों को आत्मविश्वास से भर दिया है।

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