आज़ादी की ज्वाला: बेला मित्रा—नेताजी की भांजी जिसने क्रांति में अमर गाथा लिखी
विशेष रिपोर्ट | ऑनलाइन बंगोवार्ता
बेला मित्रा (बोस), जिनका जन्म 1920 में दक्षिण 24 परगना (कोदालिया) में हुआ था, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की भांजी थीं। वह स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेविका दोनों थीं।
उन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज की झांसी की रानी ब्रिगेड में हिस्सा लिया, अपने घर को गुप्त आश्रय बनाया और 1944 में चलाया गुप्त रेडियो ट्रांसमीटर, जो कोलकाता से सिंगापुर तक संदेश पहुँचाता था। पकड़े जाने पर मौत तय थी।
जब उनके पति हरिदास मित्रा को अंग्रेज़ों ने मौत की सज़ा सुनाई, तो उन्होंने सीधे महात्मा गांधी से गुहार लगाई। अंततः दबाव में आकर अंग्रेज़ सरकार ने सज़ा को बदल दिया और हरिदास समेत तीन और क्रांतिकारी बच गए।
आजादी के बाद उन्होंने झांसी रानी रिलीफ टीम बनाई और पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के पुनर्वास का काम किया। दुर्भाग्यवश 31 जुलाई 1952 को सिर्फ़ 32 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
उनकी याद में 1958 में हावड़ा-बर्दवान कॉर्ड लाइन पर बेलनगर स्टेशन का नाम रखा गया—यह पहला रेलवे स्टेशन था जो किसी भारतीय महिला के नाम पर रखा गया।
👉 पूर्व वित्त मंत्री अमित मित्रा उनकी संतान हैं।