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शहीद मरु के शेर उमर अल मुक़्तार (रह.): १६ सितंबर १९३१—लिबिया की स्वतंत्रता के नायक

आज १६ सितंबर १९३१—इसी दिन इटालियन उपनिवेशवादियों ने फांसी पर लटका कर मरु के शेर उमर अल मुक़्तार (रह.) को शहीद कर दिया था। वे 20 साल तक लिबिया की रेगिस्तान में कब्जे वाले इटालियन साम्राज्य के खिलाफ नेतृत्व करते रहे। जब उन्हें बंदी बनाया गया, तो उनसे कहा गया—“मujाहिदों की जंग रोकने के लिए लिख कर दो, तुम्हें रिहा कर दिया जाएगा।”

लेकिन वे गर्जना करते हुए बोले—

“जिस अंगूठे से मैं रोज़ गवाही देता हूं, कि अल्लाह के अलावा कोई ईश्वर नहीं—मैं उस अंगूठे से कभी झूठ नहीं लिखूंगा। हम अल्लाह के अलावा किसी के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। हम या तो जीतते हैं, या शहीद होते हैं।”

उनकी शहादत ने लिबिया के आसमान में स्वतंत्रता की रोशनी जलाई। वे आज भी हर मुक्ति की चाह रखने वाले दिल में जीवित हैं। अल्लाह तआला उन्हें जन्नत में ऊँचा स्थान दे।

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