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“जन्नत से आया पत्थर: हजर अल-असवद की रहस्यमयी कहानी”

इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल काबा शरीफ के पूर्वी कोने में स्थित है एक अद्भुत और पूज्य पत्थर – जिसे कहते हैं हजर अल-असवद या जन्नती पत्थर। यह पत्थर मुसलमानों के लिए एक आध्यात्मिक प्रतीक है, जिसके पीछे है एक स्वर्गिक कथा।

इस्लामी परंपरा के अनुसार, यह पत्थर जन्नत से धरती पर भेजा गया था और यह शुरुआत में दूध से भी ज्यादा सफेद था। लेकिन समय के साथ इंसानों के पापों के कारण यह काला पड़ गया।

हजर अल-असवद को पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि सम्मान और प्यार का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) ने स्वयं इसे चूमा और काबा के पुनर्निर्माण के समय इसे जगह दी थी।

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक उल्का पिंड हो सकता है, जिससे इसकी दिव्य उत्पत्ति की धारणा और भी गहरी हो जाती है।

हर साल लाखों हाजी इसे चूमते हैं या दूर से इशारे में चूमते हैं – यह केवल एक पत्थर नहीं, बल्कि ईमान, इतिहास और अल्लाह से जुड़ाव का प्रतीक है।

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