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वक्फ संशोधन अधिनियम 2025: मस्जिदों और कब्रिस्तानों की सुरक्षा को लेकर जमीयत और जमात की गहरी चिंता

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर आए अंतरिम फैसले के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद और जमात-ए-इस्लामी हिंद ने विशेष चिंता व्यक्त की है। दोनों संगठनों ने देश भर में स्थित वक्फ संपत्तियों—विशेषकर मस्जिदों और कब्रिस्तानों—की सुरक्षा को लेकर निराशा जाहिर की है।

इस समय देश में लगभग 4 लाख वक्फ पंजीकृत संपत्तियाँ हैं, जिनमें अधिकांश मस्जिदें और कब्रिस्तान शामिल। हालांकि, इस फैसले में कुछ सकारात्मक बातें भी सामने এসেছে, जैसे:

  • वक्फ बोर्ड के सीईओ पद पर मुसलमानों के लिए आरक्षण

  • बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या न्यूनतम करना

  • ज़िला कलेक्टर की शक्तियाँ सीमित कर वक्फ ट्रिब्यूनल की भूमिका को प्राथमिकता देना

फिर भी, जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद महमूद मदनी और जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता सैयद सादातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि देश की लगभग 1.2 लाख मस्जिदें और 1.5 लाख कब्रिस्तान अब असुरक्षित हो सकते हैं।

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